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जानें अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को कैसे बदला!

HERE'S HOW ATAL BIHARI VAJPAYEE CHANGED INDIA

अटल बिहारी वाजपेयी एक सच्चे राजनेता थे। देशवासी उन्हें प्यार करते थे, जबकि दुनिया भर के नेता उनकी सराहना करते थे। अपने 60 साल से ज्यादा के राजनीतिक करियर में उन्होंने ऐसी विरासत बनाई, जिसने यह सुनिश्चित किया कि उन्हें कभी नहीं भुलाया जाएगा। आज उनकी दूसरी पुण्यतिथि पर हम आपको प्रधानमंत्री के रूप में उनकी प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताने जा रहे हैं।

ATAL BIHARI VAJPAYEE


  • बाबूलाल गौर की साइकिल पर बैठकर बड़े तालाब में नहाने जाते थे अटल जी
  • पुण्यतिथि विशेष: सर्वदलीय मान्यता के एकदलीय नेता थे अटलजी
  • NUCLEAR TESTS
  • GOLDEN QUADRILATERAL
  • INDIA'S MOON MISSION
  • FREE EDUCATION
  • PRIVATISATION
  • TELECOMMUNICATIONS
  • DELHI METRO
  • FOREIGN RELATIONS
बाबूलाल गौर की साइकिल पर बैठकर बड़े तालाब में नहाने जाते थे अटल जी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की आज दूसरी पुण्यतिथि है। मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री बाबूलाल गौर की दोस्ती प्रसिद्ध है। बाबूलाल गौर अटलजी को भाई साहब कहकर बुलाते थे। गौर बताते थे कि अटलजी का भोपाल से गहरा नाता था। वर्ष 1973-74 में जब अटलजी भोपाल आते थे, तो गौर उन्हें अपनी साइकिल के पीछे बैठाकर बड़े तालाब नहाने के लिए जाया करते थे।



पुण्यतिथि विशेष: सर्वदलीय मान्यता के एकदलीय नेता थे अटलजी
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की आज दूसरी पुण्यतिथि है। 16 अगस्त 2018 को उनकी मृत्यु हुई थी। वह भारत के तीन बार प्रधानमंत्री रहे। विपक्ष में रहते हुए भी वह देश के हर दल के राजनेताओं और कार्यकर्ताओं के मन में विशिष्ट स्थान बनाने में सक्षम थे। अटल जी दूसरे दलों के कार्यकर्ताओं में यह भाव पैदा करने में हमेशा सफल रहे कि काश वह हमारे दल के नेता होते! वह सर्वदलीय मान्यता के एकदलीय नेता थे।

NUCLEAR TESTS

NUCLEAR TESTS
मई 1998 में भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। ये 1974 के बाद भारत का पहला परमाणु परीक्षण था। वाजपेयी ने परीक्षण ये दिखाने के लिए किया था कि भारत परमाणु संपन्न देश है। 11 मई, 1995 में जब अमेरिकी चैन की नींद सो रहे थे तब भारत ने पोखरण द्वितीय का सफलतापूर्वक परीक्षण किया और अमेरिकी राष्ट्रपति की नींद उड़ा दी। भारत ने 11 और 13 मई को तीन परमाणु विस्फोट कर हंगामा मचा दिया था।

GOLDEN QUADRILATERAL
प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी के कार्यकाल में ही 4 बड़े भारतीय शहरों को सड़क मार्ग से जोड़ने का निर्णय लिया गया था। यह स्वर्णिम चतुर्भुज था - दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और कोलकाता को जोड़ने वाले विश्व स्तरीय राजमार्गों की एक परियोजना। यह परियोजना 1999 में शुरू हुई थी और 2006 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन इसका काम 2012 में खत्म हुआ था।

INDIA'S MOON MISSION
INDIA'S MOON MISSION

INDIA'S MOON MISSION
15 अगस्त 2003 को वाजपेयी ने अपने संबोधन में लाल किले की प्राचीर से घोषणा की थी कि भारत एक मून मिशन की योजना बना रहा हैं। यह 22 अक्टूबर 2008 को सच हुआ जब चंद्रयान । को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया।



FREE EDUCATION
वाजपेयी सरकार ने 14 वर्ष से कम आयु वाले सभी बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया। "सर्व शिक्षा अभियान - सभी के लिए शिक्षा" इसी वजह से शुरू किया गया था। उन्होंने शिक्षा के अधिकार को एक मौलिक अधिकार बनाया।

PRIVATISATION
अटल बिहारी वाजपेयी हमेशा निजीकरण के पक्ष में थे। उनका मानना था कि व्यापार में सरकार की भूमिका न्यूनतम होनी चाहिए। उन्होंने अपनी सरकार में एक विनिवेश मंत्री बनाया। अरुण जेटली पहले विदेश मंत्री थे। भारत एल्युमिनियम कंपनी, हिंदुस्तान जिंक और इंडियन पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के विनिवेश के प्रमुख फैसले उन्होंने ही लिए थे।

TELECOMMUNICATIONS

TELECOMMUNICATIONS
भारत में संचार क्रांति लाने का श्रेय वाजपेयी सरकार को जाता है। उन्होंने दूरसंचार नीतियों में क्रांति ला दी और निश्चित लाइसेंस शुल्क की प्रणाली को रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल में बदल दिया। भारत संचार निगम लिमिटेड 15 दिसंबर 2000 को अस्तित्व में आया।

DELHI METRO

DELHI METRO
मेट्रो दिल्ली का गौरव है। इसका उद्घाटन पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने ही किया था। उनके कार्यकाल के दौरान पहली मेट्रो ट्रेन 24 दिसंबर 2002 में शुरू हुई थी। इसने दिल्ली के लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन का एक नया और आधुनिक रास्ता खोला। आज यह राष्ट्रीय राजधानी की जीवन रेखा है।

FOREIGN RELATIONS
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में चीन के साथ भारत के संबंध बेहतर हुए और व्यापार से संबंधित कई समझौते हुए। उन्होंने इजराइल के साथ सैन्य और रणनीतिक साझेदारी भी स्थापित की। उन्होंने आगरा शिखर सम्मेलन के लिए पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ को आमंत्रित किया। एक राजनेता के रूप में वाजपेयी का कद प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान काफी बढ़ गया।

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