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The Pride Of Over 130 Crore Indian's, the pride of India

ISRO The Pride Of Over 130 Crore Indian's

भारत आज अपना 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आज का दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन - ISRO के लिए भी उल्लेखनीय है। 1969 में आज ही के दिन एजेंसी का गठन किया गया था। इस खास मौके पर हम आपको ISRO की प्रमुख 6 उपलब्धियां बताने जा रहे हैं, जिनकी वजह से हर भारतीय गर्व महसूस करता है।

ISRO The Pride Of Over 130 Crore Indian's


Scored a Century
15 फरवरी, 2017 को ISRO ने चेन्नई से करीब 125 किलोमीटर दूर श्री हरिकोटा से एक ही रॉकेट से 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित कर बड़ा इतिहास रचा था। 15 फरवरी को सुबह 5:28 बजे पीएसएलवी-सी37/कार्टोसैट-2 श्रृंखला के सेटेलाइट मिशन के प्रक्षेपण के लिए उल्टी गिनती शुरू हुई थी और 9:28 बजे इसे छोड़ा गया था।

The Indian Space Research Organization (ISRO)
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 

Mangalyaan
ISRO की बदौलत, भारत अपने पहले प्रयास में सफलतापूर्वक मंगल पर पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। नासा, सोवियत अंतरिक्ष कार्यक्रम और यूरोपीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के अलावा ISRO मंगल ग्रह पर पहुंचने वाली चौथी एजेंसी बन गई। मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) का बजट केवल 450 करोड़ रुपये था। मिशन का लक्ष्य ग्रह के वातावरण को लेकर अधिक डेटा एकत्र करना था।

Chandrayaan-I
22 अक्टूबर, 2008 को 312 दिनों का मानव रहित चंद्रयान मिशन शुरू हुआ। चन्द्रयान चंद्रमा की तरफ कूच करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष यान था। चन्द्रयान के साथ भारत चांद पर यान भेजने वाला छठा देश बन गया था। इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा की सतह के विस्तृत नक्शे और पानी के अंश और हीलियम की तलाश करना था।



Heaviest Commercial Mission
10 जुलाई 2015 को ISRO ने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-सी 28 का उपयोग करते हुए पांच ब्रिटिश उपग्रहों का एक साथ प्रक्षेपण किया था। इनमें से तीन अर्थ ऑब्जर्वेशन र दो तकनीकी उपग्रह थे। प्रक्षेपित किए गए पांच उपग्रहों का वजन 1440 किलोग्राम था। इस लिहाज से यह अब तक का सबसे वजनी मिशन था।

RNSS (Indian Regional Navigation Satellite System)
इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम

IRNSS (Indian Regional Navigation Satellite System)
भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) का ऑपरेशन नाम NAVIC था। 7 उपग्रहों के इस समूह से भारत को खुद का नेविगेशन सिस्टम बनाने में मदद मिली थी। नेविगेशन हमारे देश के 15,000 किमी के क्षेत्र को कवर करता है। ग्राउंड स्टेशन में दो और उपग्रह मौजूद हैं। इसके अलावा सात उपग्रहों को संचालन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसने भारत को दुनिया के उन 5 देशों में से एक बना दिया, जिनके पास अपनी खुद की नेविगेशन प्रणाली हैं।



1st Indian Satellite Launch
19 अप्रैल, 1975 को पहला भारतीय उपग्रह आर्यभट्ट प्रक्षेपित किया गया था। इस उपग्रह का नाम प्रसिद्ध भारतीय खगोल वैज्ञानिक आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया था। यह पूरी तरह से भारत में डिजाइन किया गया था। यहां तक कि इसका निर्माण भी भारत में ही हुआ था। इसका प्रक्षेपण सोवियत यूनियन की सहायता से कॉस्मॉस-3 एच से किया गया था।

ISRO ने कई बार साबित किया है कि यह संगठन राष्ट्र के विकास को ध्यान में रखकर काम करता है। संगठन की उपलब्धियों ने देश को गौरवान्वित किया ISRO दुनिया की शीर्ष 5 सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक बन गई है। जय हिन्द!


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