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INTERNATIONAL DAY OF THE GIRL CHILD DAY

 लड़कियां हमारा भविष्य हैं

लड़कियां दुनिया बदलने की क्षमता रखती हैं। तमाम बाधाएं भी उनकी ताकत को कमजोर नहीं कर सकती हैं। बाल विवाह, शिक्षा असमानता, हिंसा, दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और स्वास्थ्य सेवा की असमानता जैसे मुद्दों से निपटने से लेकर, सभी बाधाओं को तोड़ती हुई सबके लिए एक सुरक्षित दुनिया बनाने की कोशिश कर रही हैं।

INTERNATIONAL DAY OF THE  GIRL CHILD DAY

'लड़कियां अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में कई बार भेदभाव की शिकार हुई हैं। लॉकडाउन, स्कूलों को बंद करने और आर्थिक स्थिति पर अन्य प्रतिबंधों का प्रभाव लड़कियों को शोषण के जोखिम में डाल रहा है। कोविड-19 से संबंधित दुष्प्रभाव का भी वह सामना कर रही हैं।

"My Voice, Our Equal Future' sH बार इंटरनेशनल डे ऑफ द गर्ल चाइल्ड की थीम है। यह दिन लड़कियों को सशक्त करने, मानवाधिकारों को बढ़ावा देने, लड़कियों की जरूरतों और चुनौतियों को सामने लाने के लिए है। यह दिन लड़कियों को लिंग आधारित हिंसा, एचआईवी-एइस और हानिकारक प्रथाओं से मुक्त रहने में मदद करने पर केंद्रित है।


क्या आप जानते हैं?

1 IN 4 GIRLS 

1 IN 10 BOYS

दुनिया भर में 15-19 वर्ष की आयु की हर 4 लड़कियों में से 1 को न तो शिक्षा दी जाती है और न ही रोजगार, जबकि इसी उम्र के 10 लड़कों में से 1 के साथ ऐसा होता है।


2021 तक लगभग 435 मिलियन महिलाएं और लड़कियां एक दिन में 1.90 डॉलर से कम पर जिंदगी गुजारेगी, जिसमें 47 मिलियन ऐसी महिलाएं भी शामिल है जो COVID-19 के परिणामस्वरूप गरीबी का दश झेलेगी।


1-out of-3

दुनिया भर में हर 3 में से 1 महिला ने शारीरिक या यौन हिंसा का सामना किया है।

कम से कम 50% देश अभी भी कानूनी या व्यावहारिक तौर पर विरासत में मिली चल या अचल संपत्ति पर लड़कियों के हक के मामले में भेदभाव करते हैं।

Girl Power

मध्य प्रदेश के भोपाल में 12 वर्षीय मुस्कान अहिरवार इस बात का उदाहरण है कि लड़कियां क्या कर सकती हैं। उन्होंने 9 साल की उम्र में खुद की एक लाइब्रेरी शुरू की और ऐसा करने वाली सबसे कम उम्र की लड़की बनीं। लाइब्रेरी का नाम बाल पुस्तकालय है। ये पुस्तकालय राज्य शिक्षा केंद्र के पास स्लम एरिया में चलता है, जहां शिक्षा के साथ गरीब बच्चों को सशक्त बनाया जाता है। मुस्कान को 2010 में नीति आयोग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में 'महिला रूपांतरण पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।


क्या किया जाना चाहिए?

बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए दुनिया को एकजुट होना चाहिए। जेंडर इक्विटी की लड़ाई में लड़कियां समान भागीदार हैं। उन्हें अपनी पसंद के हिसाब से चलने के लिए पूरा समर्थन मिलना चाहिए। एक वैश्विक समुदाय के रूप में, हमें जीवन के सभी क्षेत्रों में लड़कियों के चेंजमेकर बनने के अवसरों को बढ़ाने के लिए एकजुट होना चाहिए। सभी कार्यों के केंद्र में लड़कियों की आवाज होनी चाहिए। लड़कियों के लिए कोई भी निर्णय बिना उनकी सहमति के नहीं लेना चाहिए।

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